संविधान निर्माण के कुछ महत्तवपूर्ण हिस्से जिसे आप को जानना बहुत जरूरी हैं।

स्ंविधान निर्माण

  • बी एन राव को संविधान सभा का संवैधानिक सलाहकार नियुक्त किया गया था।
  • संविधान सभा का प्रथम अधिवेशन 6 दिसम्बर, 1946 को संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में प्रारम्भ हुआ। डां. सच्चिदानन्द सिन्हा को सर्वसम्मति से अस्थायी अध्यक्ष चुना गया।
  • 11 दिसम्बर, 1946 की बैठक में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को सभा का अस्थयी अध्यक्ष चुना गया।
  • 13 दिसम्बर, 1946 को पं. जवाहर लाल नेहरू ने ‘उद्देश्य प्रस्ताव‘ प्रस्तुत कर संविधान की आधारशिला रखी।
  • संविधान के निर्माण का कार्य करने के लिए अनेक समितियॉ बनाई गई, जिनमें सबसे प्रमुख डॉ. भीमराव अम्बेडकर की अध्यक्षता में बनी 7 सदस्यों वाली प्रारूप समिति थी।
  • प्रारूप समिति में डॉ. अम्बेडकर के अतिरिक्त सर्वश्री एन गोपालस्वामी आयंगर, अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर, के एम मुन्शी, मोहम्मद सादुल्लह, डी पी खेतान (1948 में इनकी मृत्यु के पश्चात् टी टी कृष्णामाचारी) और एन माधव राव अन्य सदस्य थे।
  • संविधान को तैयार करने में 2 साल 11 महीने 18 दिन का समय लगा।
  • संविधान 26 नवम्बर, 1949 को बनकर तैयार हो गया था और इसी दिन इस पर अध्यक्ष के हस्ताक्षर हुए।
  • हालाँकि संविधान 26 नवम्बर, 1949 को तैयार हो गया था, परन्तु इसके अधिकतर भागों को 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया क्योंकि सन् 1930 से ही सम्पूर्ण भारत में 26 जनवरी का दिन ‘स्वाधीनता दिवस‘ के रूप में मनाया गया था। इसीलिए 26 जनवरी, 1950 को प्रथम गणतन्त्रता दिवस मनाया गया।
  • संविधान सभा की अन्तिम बैठक 24 जनवरी, 1950 को हुई और इसी दिन संविधान सभा द्वारा डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को भारत का प्रथम राष्ट्रपति चुना गया।
  • नवनिर्मित संविधान में 395 अनुच्छेद, 22 भाग तथा 8 अनुसूचियाँ थी।
  • डॉ. भीमराव अम्बेडकर को भारतीय संविधान के ‘जनक‘ के रूप में जाना जाता हैं।

मूल अधिकार
भारतीय नागरिकों को 6 मूल अधिकार प्राप्त हैं, जो निम्नलिखित हैं

  • समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18)
  • स्वतन्त्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22)
  • शोषण के विरूध्द अधिकार (23 और 24)
  • धार्मिक स्वतन्त्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28)
  • संस्कृति और शिक्षा सम्बन्धी अधिकार (29 व 30)
  • संवैघानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32)

भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य हैं-

  • संविधान का पालन करे और उस के आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वजों, राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान का आदर करें।
  • स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शो को ह्नदय में संजोए रखे और उन का पालन करें।
  • भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण रखें।
  • देश की रक्षा करे और आह्नान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करें।
  • भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करे जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हो, ऐसी प्रथाओं का त्याग करें जो स्त्रियों के सम्मान के विरूध्द हैं।
  • हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे और उस का परिरक्षण करें।
  • प्राकृतिक पर्यावरण की, जिस के अतंर्गत वन, झील नदी और वन्य जीव है, रक्षा करे और उस का संवर्धन करे तथा प्राणि मात्र के प्रति दयाभाव रखें।
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मरनववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें।
  • सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहें।
  • व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास और उपलब्धि की नई उंचाइयों को छू लें।
  • यदि माता-पिता या यंरक्षक है, छह वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु वाले अपने, यथास्थिति, बालक या प्रतिपाल्य के लिए शिक्षा का अवसर प्रदान करें।

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